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अधिवक्ता मुकेश शर्मा का आरोप: जोगिन्द्रा बैंक सोलन में 72 घंटे में 20 लाख के संदिग्ध ऋण स्वीकृत

Mukesh Kumar Sharma(अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा)

चंडीगढ़/सोलन,15 जुलाई। जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (जेसीसीबी), सोलन के प्रबंधन एवं कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध बैंकिंग नियमों के कथित उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने 13 जुलाई 2026 को नाबार्ड, मुंबई के मुख्य सतर्कता अधिकारी को विस्तृत शिकायत भेजकर स्वतंत्र सतर्कता जांच तथा फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है।

72 घंटे में 20 लाख के 2 ऋण स्वीकृत
शिकायत के अनुसार तत्कालीन अर्की शाखा प्रबंधक सचिन पाल द्वारा ऋण खाता संख्या 100118003100096 एवं 100118003100097 के माध्यम से 10-10 लाख रुपये, अर्थात कुल 20 लाख रुपये के ऋण मात्र 72 घंटे के अंतराल में एक ही व्यक्ति को स्वीकृत एवं वितरित किए गए।

एडवोकेट मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि 10 एवं 11 सितम्बर 2022 को बैंक अवकाश होने के बावजूद इतनी अल्प अवधि में ऋण मूल्यांकन, दस्तावेजी परीक्षण तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किया जाना गंभीर संदेह उत्पन्न करता है।

आरोपों की मुख्य बातें
– उक्त ऋण शाखा के परिचालन क्षेत्र से बाहर स्वीकृत किए गए
– संबंधित शाखा कुनिहार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त नहीं किया गया
– उधारकर्ता की वित्तीय क्षमता एवं सिबिल स्कोर का समुचित परीक्षण नहीं किया गया
– बैंक एवं नियामकीय दिशानिर्देशों का उल्लंघन

शिकायत में यह भी कहा गया है कि बैंक प्रबंधन ने इन कथित अनियमितताओं के बावजूद संबंधित अधिकारी सचिन पाल को संरक्षण प्रदान किया। राम पॉल, वर्तमान एजीएम का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके विरुद्ध पूर्व में दर्ज मामलों के बावजूद अनुचित लाभ पहुंचाए गए।

RBI ने पहले भी लगाया था जुर्माना
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 12 मार्च 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कथित उल्लंघन के संबंध में जेसीबी लिमिटेड, सोलन पर 1 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया गया था।

नाबार्ड से क्या मांग
अधिवक्ता ने नाबार्ड से मांग की है कि:
1. दोनों ऋण खातों की स्वतंत्र सतर्कता जांच कराई जाए
2. ऋण फाइलें, मूल्यांकन रिपोर्ट, डिजिटल लॉग, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जाएं
3. फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए
4. दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय, दीवानी एवं आपराधिक कार्रवाई हो

***नोट: इस समाचार में वर्णित सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा नाबार्ड को प्रस्तुत शिकायत पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि किसी न्यायालय अथवा सक्षम जांच एजेंसी द्वारा अभी तक नहीं की गई है। संबंधित अधिकारियों/बैंक प्रबंधन की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।***


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